आखिर लड़कियों का क्या रोल है हमारी सोसाइटी मे | कहने को लड़की ही जीवन का आधार है उसी की वजह से आज आप सब लोग इस धरती पर है उसी की वजह से आज मे ये लिख पा रहा हु, उसी की वजह से आप यह पढ़ पा रहे है, लेकिन फिर भी क्यों उसे आजतक हमारे समाज मे वो स्थान नहीं मिल पाया है, कहने को लड़कियां आजकल हर फील्ड मे अपना जौहर दिखा रही है, लेकिन फिर भी समाज आज भी लड़कियों को कमजोर क्यों मानता है |
कमजोर लड़कियां नहीं है कमजोर है हम लोगों की मानसिकता, क्योंकि हमसे आजतक ये स्वीकार ही नहीं किया है पूरी तरह से, कि लड़कियां लड़को से कम नहीं है हम सब जानते है फिर भी आदमी तो आदमी महिलाएं भी जब बच्चे को जन्म देती है तो सोचती है कि लड़का हो ताकि उनका वंश आगे बढ़ सके, आधे से ज़ादा तो औरत ही महिला वर्ग की दुश्मन है मै ये सब अपने मन से नहीं बोल रहा हु, आप गूगल कीजिये, डाटा निकालिये, फिर देखिये.
आये दिन लड़कियों पर अत्याचार(बलात्कार, दहेज़ उत्पीड़न, शोषण ) होते है शहर हो या गांव हो, बस फर्क इतना है शहर मै छोटे कपड़ो के नाम पर, और गावों मे छोटी जाति धर्म के नाम पर,
एक लड़की अपने आप को कही महफूज नहीं समझती है चाहे शहर हो या गांव |
मेरा इस लेख के माध्यम से बस इतना कहना है की लड़की की कोई जात या धर्म नहीं होता है लड़की लड़की होती है चाहे किसी की भी हो, उसे अपनी बहन, माँ की तरह पेश आओ, आधी से ज्यादा परेशानी अपने आप खत्म हो जाएगी |
और मेरा सरकार से निवेदन है की जल्द से जल्द बलात्कार के लिए कोई कड़ा क़ानून संसद मै पास किया जाये, ताकि देश की बेटियां भयमुक्त हो कर अपना जीवन जी सके |और बलात्कार के जितने भी केस है उच्चतम न्यायालय को जल्दी से जल्दी न्याय करना चाहिए, क्योंकि देर से मिला न्याय भी अन्याय के सामान ही होता है.
इसी के साथ मै विराम लेता हु आप अपनी प्रतिकिया अवश्य व्यक्त करें, ताकि मै अपनी लेखनी मै और सुधार कर सकूँ.
जय जवान जय किसान
जय हिन्द जय भारत
